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दिल्ली स्लीपर बस गैंगरेप केस में 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, जैविक साक्ष्य अहम

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 30, 2026 12:00 am IST,  Updated : Sep 30, 2026 12:06 am IST

दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की यात्रा के दौरान स्लीपर बस में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चालक और परिचालक के खिलाफ 398 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है।

Delhi , gangrape case- India TV Hindi
दिल्ली स्लीपर बस गैंगरेप केस Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने अगस्त में ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की यात्रा के दौरान एक नाबालिग से स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चालक और परिचालक के खिलाफ 398 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच में बस से मिले जैविक साक्ष्य अहम हैं। चार्जशीट 18 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत में दाखिल की गई थी और अदालत ने 24 सितंबर को इसका संज्ञान लिया।

चार अगस्त की रात को हुई थी घटना

घटना चार अगस्त की रात को हुई जब उत्तर प्रदेश की रहने वाली नाबालिग यह समझकर ग्रेटर नोएडा में बस में सवार हुई कि यह नोएडा सेक्टर 63 की तरफ जा रही थी। पुलिस के अनुसार, बस में सवार होने के बाद नाबालिग को अहसास हुआ कि गाड़ी में कोई अन्य यात्री नहीं है और उसने उतरने का प्रयास किया। हालांकि, परिचालक ने कथित तौर पर उसे गाड़ी से उतरने से रोक दिया और दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद बस दिल्ली की ओर बढ़ी और नाबालिग से बस के अंदर कथित रूप से दुष्कर्म किया गया और फिर उसे कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास बस से उतार दिया गया जहां उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 

पुलिस ने बताया कि त्वरित कार्रवाई करते हुए उसने बस का पता लगाया और बस चालक और परिचालक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की कई टीम ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और कुछ ही घंटों के भीतर तिमारपुर के एक पार्किंग क्षेत्र में बस का पता लगा लिया, जिसके बाद कानपुर निवासी चालक कुलदीप और परिचालक संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपपत्र में 10 पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों को गवाह बनाया गया है। 

फॉरेंसिक जांच के दौरान जैविक साक्ष्य मिले

बस की फॉरेंसिक जांच के दौरान, जांचकर्ताओं ने जैविक साक्ष्य बरामद किए, जिन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में बस से जुड़ी कई सुरक्षा और नियामक खामियां भी सामने आईं। इस घटना ने 2012 के निर्भया कांड की यादें ताजा कर दीं, जब 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ एक बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और बाद में उसे सड़क पर फेंक दिया गया था।

 इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्लीपर बस की घटना समेत दिल्ली-एनसीआर में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़ी खबरों का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों की तुलना 2012 के निर्भया कांड से करना स्वाभाविक है और सवाल किया कि उसके बाद कानून-व्यवस्था से जुड़ी व्यवस्थाओं में कोई ठोस सुधार हुआ है या नहीं।

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